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लुनयु1
 

"बुध्द फा2 " सबसे अधिक महान है; विश्व के सभी सिध्दान्तों में यह सबसे जटिल और असाधारण विज्ञान है। इस क्षेत्र में खोज करने के लिए, मनुष्य को मूल रूप से अपने पारंपरिक विचारों को बदलना होगा। वर्ना, ब्रह्माण्ड का सत्य मनुष्यजाति के लिए हमेशा एक रहस्य बना रहेगा, और साधारण लोग हमेशा अपनी अज्ञानता की सीमा में भटकते रहेंगे।

तो, "बुध्द फा" सही अर्थ में क्या है? क्या यह एक धर्म है? क्या यह एक दर्शनवाद है? यह समझ केवल "आधुनिक बुध्दमत के विद्वानों" की है, जो केवल लिखित अध्ययन करते हैं। वे इसे दर्शनवाद की श्रेणी में रखते हैं जो वाद-विवाद तथा शोध के लिए है। वास्तव में, "बुध्द फा" शास्त्रों तक सीमित वह संक्षिप्त अंश ही नहीं है, जो केवल "बुध्द फा" का प्रारंभिक स्तर है। कणों और अणुओं से ब्रह्माण्ड तक, सूक्ष्मतम से स्थूलतम तक, "बुध्द फा" सभी रहस्यों को समझने की अंतर्दृष्टि है, इसमें सभी कुछ समाहित है और इससे कुछ भी अछूता नहीं है। यह ब्रह्माण्ड की प्रकृति, "सत्य-करुणा-सहनशीलता है", जो विभिन्न स्तरों पर विभिन्न रूपों में व्यक्त होती है। इसी को ताओ विचारधारा में ताओ3  कहते हैं, और बुध्द विचारधारा में "फा" कहते हैं।

वर्तमान मानव विज्ञान कितना भी विकसित क्यों न हो चुका हो, ब्रह्माण्ड के रहस्यों को यह अंशमात्र ही समझ पाया है। जब कभी हम "बुध्द फा" की विशिष्ट घटनाओं का उल्लेख करते हैं, ऐसे लोग हैं जो कहेंगे : "अब हम इलेक्ट्रॉनिक युग में हैं और विज्ञान कितना विकसित हो चुका है। अंतरिक्षयान दूसरे ग्रहों पर जा चुके हैं, किन्तु आप अब भी उन पुराने अंधविश्वासों की बातें करते हैं।" स्पष्ट रूप से कहा जाये तो, कम्प्यूटर कितने भी विकसित क्यों न हों, वे मानव मस्तिष्क से बराबरी नहीं कर सकते, जो आज भी एक अनसुलझा रहस्य है। अंतरिक्षयान कितनी भी दूरी तक चला जाये, वह इस भौतिक आयाम को पार नहीं कर सकता जिसमें मानवजाति का अस्तित्व है। जो कुछ आज के मानव ज्ञान से समझा जा सकता है वह अभी भी अत्यन्त सीमित और अपूर्ण है - यह ब्रह्माण्ड की प्रकृति की सही समझ के आसपास भी नहीं है। कुछ लोग निष्पक्ष रूप से होने वाली अद्भुत घटनाओं के तथ्यों का सामना करने, जांचने या स्वीकारने का साहस तक नहीं कर पाते, क्योंकि वे बहुत रूढ़ीवादी हैं और अपनी पारंपरिक विचारधारा को बदलने के लिए अनिच्छुक हैं। केवल "बुध्द फा" द्वारा ब्रह्माण्ड, काल-अवकाश, और मानव शरीर के रहस्यों को पूरी तरह उजागर किया जा सकता है। यह वास्तव में दुष्टता से पवित्रता, बुराई से अच्छाई का भेद करने में सक्षम है, और उचित समझ प्रदान करते हुए सभी अवधारणाओं को हटा सकता है।

आज के मानवीय विज्ञान के लिए मार्गदर्शक सिध्दान्त इसकी शोध और प्रगति में इस भौतिक जगत तक सीमित हैं, जैसे किसी विषय पर तब तक अध्ययन नहीं किया जायेगा जब तक उसे मान्यता न प्राप्त हो जाये - इसने यही मार्ग अपना लिया है। जैसे वे घटनाएं जो हमारे आयाम में अस्पर्श और अदृश्य हैं, किन्तु निष्पक्ष रूप से विद्यमान हैं और हमारे भौतिक आयाम में प्रत्यक्ष रूप से परावर्तित होती हैं, उन्हें स्वीकारा नहीं जाता और अज्ञात घटना मान लिया जाता है। हठी लोग तथ्यों के बिना ही यह तर्क अपना लेते हैं कि ये केवल प्राकृतिक घटनाऐं हैं, जबकि कुटिल सोच वाले लोग अपने विवेक के विरुध्द चलते हुए इन सब घटनाओं को अंधविश्वास का नाम दे देते हैं। कम सोचने वाले लोग स्वयं को इन विषयों से इस बहाने के साथ अलग कर लेते हैं कि विज्ञान अभी इतना विकसित नहीं है कि इन्हें सुलझा सके। यदि मनुष्य स्वयं को तथा ब्रह्माण्ड को नये तरीके से देख सके और अपनी कठोर धारणाओं में बदलाव ला सके, तो मनुष्य जाति के विकास में नये युग का पर्दापण होगा। "बुध्द फा" लोगों को अथाह और असीमित विश्व को समझने की अंर्तदृष्टि प्रदान करता है। युगों-युगों से, केवल "बुध्द फा" ही मनुष्यों, भौतिक जगत के अनेक आयामों, जीवन और संपूर्ण ब्रह्माण्ड को पूरी तरह समझा पाया है।


 1 लुनयु—टिप्पणी
 2 फा—विधि, धर्म, सिध्दान्त
 3 ताओ—"मार्ग", "रीति", यह शब्द व्यक्ति के लिए भी प्रयोग होता है जो "ताओ प्राप्त" कर चुका है।